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सृष्टि कैसे बनी ?

 यह प्रश्न हर किसी को परेशान करता है। बचपन में यह एक हमारी सोचों पर प्रभाव डालने वाला और अतंत्य महत्वपूर्ण प्रश्न था। लेकिन किसीने भी हमें इस प्रश्न का उत्तर सही नहीं दिया। क्यों कोई इसका उत्तर नहीं दे पाते ? पर हमनें स्कूल में कुछ विषय के द्वारा जाना लेकिन फिर भी आज भी हमारे अंदर कुछ सवाल जैसे कि वैसे है उनके उत्तर हमें आज भी नहीं मिलें। तो आइए आज हम जानेंगे कि सृष्टि कैसी बनी।

यूहन्ना 3:16 - निःस्वार्थ प्रेम का संदेश

  परिचय यूहन्ना 3:16, जो कई भाषाओं में विश्वासी लोगों द्वारा प्रिय एवं महत्वपूर्ण माना जाता है, वह एक बाइबलीय श्लोक है जो नया नियम में यूहन्ना इंजील से लिया गया है। यह एक संक्षेप्त श्लोक है जो इसाई धर्म का मूल संदेश समर्थित करता है, जो परमेश्वर का मानवता के प्रति निःस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है। इस लेख में हम यूहन्ना 3:16 के महत्व को, इसके संदर्भ को, और इसमें समाहित चिरस्थायी संदेश को समझेंगे। यूहन्ना 3:16 का संदर्भ यूहन्ना अध्याय 3 के पूर्ववर्ती श्लोकों में, यीशु ने एक फ़रीसी नामक निकोदेमस से एक गहरी चर्चा की। इस चर्चा में, यीशु ने "फिर से पैदा होना" या "ऊपर से पैदा होना" की अवधारणा को समझाया, जो अनन्त जीवन के लिए आवश्यक आध्यात्मिक पुनर्जन्म को बताती है। श्लोक 14 में, यीशु ने यहूदी लोगों को चेताया कि पुरानी धरोहर में मूसा ने विदेशी सांप को ऊंचा उठाकर उन्हें चंदन का उपचार किया था, जिसे भव्य भविष्य में उसके क्रूसीफ़िक्सन के साथ जोड़ दिया गया। यूहन्ना 3:16 का संदेश यूहन्ना 3:16 एक संक्षेप्त लेकिन शक्तिशाली वाक्य है जो इसाई धर्म के मूल संदेश को समझाता है। इसमें लिखा है, ...

क्यों परमेश्वर को पृथ्वी पर आना पड़ा ?

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         प्राचीन धार्मिक पुस्तक बाइबल, यहूदी और ईसाई धर्मों के लोगों के जीवन और आत्मिक विकास के मूल्यों और सिद्धांतों को समर्थन करती है। बाइबल में कहानियां, उपदेश और भगवान के चरित्र के माध्यम से दिखाया गया है कि परमेश्वर को पृथ्वी पर क्यों आना पड़ा था। इस विषय में कई पाठ हैं, जो भगवान के चित्रण के साथ-साथ मनुष्य के साथ उनके संबंध को भी समझाते हैं। 1. मनुष्य के पाप (Sin of Man): बाइबल में कहा जाता है कि मनुष्य धर्म और नैतिकता में कमजोर हो जाता है और अपने पापों के कारण भगवान से दूर हो जाता है। इसलिए, परमेश्वर ने अपनी कृपा और सामर्थ्य के कारण पृथ्वी पर आकर मनुष्य को अपने पापों से छुटकारा देने का निर्धारण किया। 2. संबंधों की स्थापना (Establishing Relationships): बाइबल में दिखाया गया है कि परमेश्वर अपने भक्तों के साथ संबंध स्थापित करना चाहते हैं। उन्हें अपने आत्मिक विकास और उन्नति के लिए मार्गदर्शन करने के लिए भूमि पर आना पड़ा। 3. मनुष्य की रक्षा (Redemption of Humanity): बाइबल के अनुसार, परमेश्वर ने मनुष्य की रक्षा के लिए अपने पुत्र यीशु मसीह को पृथ्वी पर भेजा। उ...

बाइबल: ज्ञान और धरोहर की एक अद्भुत पुस्तक

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  प्रस्तावना: बाइबल, जिसे "पवित्र शास्त्र" के रूप में भी जाना जाता है, मानव इतिहास में सबसे प्रभावशाली और पूज्य पाठ है। यह दुनिया भर के लाखों लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है, जो मार्गदर्शन, प्रेरणा और नैतिक शिक्षाओं का स्रोत बनती है। बाइबल एक पवित्र पाठों और धार्मिक लेखों का संग्रह है, जिसका ऐतिहासिक, साहित्यिक और नैतिक मूल्य है। इस लेख में, हम बाइबल के उत्पत्ति, संरचना, महत्व और सदैव चलने वाले विरासत को जानेंगे। १. उत्पत्ति और संरचना: बाइबल की उत्पत्ति हजारों साल पहले के इतिहास में खोजी जा सकती है। यह विविध लेखों का संक्षेप है, जो प्राचीन सभ्यताओं के विश्वासों, इतिहासों, भविष्यवाणियों और कानूनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। बाइबल को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता है: पुराना नियमावली और नया नियमावली। पुराना नियमावली यहूदी धर्म के लिए पवित्र मानी जाने वाली लेखों का संग्रह है जो हिब्रू भाषा में लिखे गए हैं, जिनमें प्रकृति की कहानियाँ, पितृ-मुनि और पूर्वजों के जीवन, इजराइलियों के मिस्र से निकास, और विभिन्न नैतिक शिक्षाएं शामिल हैं। नया नियमावली यीशु ख्रिस...